प्रज्ज्वलन
निज ह्रदय को झकझोरती एक चिंगारी, एक आवाज़...
Tuesday, November 18, 2014
दोहा
जिनके उर न छल-कपट, घृणा न द्वेष अहन्त!
वे ही ईश्वर रूप हैं, सविता, बालक, सन्त!!
- रोहित श्रीवास्तव "अथर्व"
दीवाली
समर्पित जब सकल जीवन तो फिर मान क्यों सवाली है?
कि क्यों दिल के किसी कोने में अब भी रात काली है?
हृदय में प्रेम दृढ़ विश्वास के गर दीप जल जाएँ,
तो जीवन की हरेक मावस दीवाली ही दीवाली है!
- रोहित श्रीवास्तव "अथर्व"
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)
About Me
रोहित 'अथर्व'
View my complete profile
My Blog List
आभास
यह सम्वत् प्रलयंकारी है
7 years ago
$$$ उत्तिष्ठ भारत $$$
भारत
15 years ago
Blog Archive
▼
2014
(2)
▼
November
(2)
दोहा
दीवाली
►
2010
(1)
►
January
(1)
►
2009
(5)
►
December
(1)
►
November
(1)
►
February
(3)
►
2008
(1)
►
December
(1)