चहुँ ओर है उल्लास, मन पुलकित ह्रदय में हर्ष है!
उज्ज्वल भविष्यत संग ले, लो आ रहा नव वर्ष है!!
उज्ज्वल पाना है यदि भविष्य, तो प्रखर कर्म करना होगा,
युग का तम हरने, निज को बन दीप सतत् जलना होगा!
आज मांगती माँ कुर्बानी हम बलिदानी वीरों से,
किंचित नहीं हमें बंधना है, पाश्चात्य जंज़ीरों से!!
इस आस की रख लाज लो, विश्वास का यह कर्ज़ है!
उज्ज्वल भविष्यत संग ले, लो आ रहा नव वर्ष है!!
अपनी प्रतिभा को विकसाऐं, बनें सरल सुविचारी हम,
परमपिता के पुत्र, बनें उसके यश के अधिकारी हम!
ईशकृपा पाने हित हमको काँटों पर चलना होगा,
निज को कुंदन सा निखारने, लोहे सा गलना होगा!!
अपने अहम् के दहन में ही मानवी उत्कर्ष है!
उज्ज्वल भविष्यत संग ले, लो आ रहा नव वर्ष है!!
हम ही ग्वाल-बाल थे, हम ही वानर-रीछ विशाल से,
आज पुन: है कदम मिलाना महाकाल की चाल से!
क्या कारण, क्यों शिथिल हो गयी आज हमारी चेतना,
क्यों करते जा रहे अनसुनी, अपने पिता की वेदना!!
चलो बढें अपने गौरव हित, युगपुत्रों का फ़र्ज़ है!
उज्ज्वल भविष्यत संग ले, लो आ रहा नव वर्ष है!!
- नव वर्ष की शुभकामनाओं सहित,
- रोहित श्रीवास्तव “अथर्व”

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