शुभ वासन्ती पर्व है, अनुपम अवसर ज्वार,
संयम, सेवा, साधना, सुविचारी पतवार!
इसे थामकर जो चलें, बाँटें जग को प्रीत,
वे ही पाते प्यार गुरु का, तरते सागर पार!!
- रोहित श्रीवास्तव 'अथर्व'
यह सम्वत् प्रलयंकारी है
7 years ago
निज ह्रदय को झकझोरती एक चिंगारी, एक आवाज़...
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