कुपित वीणा है विचलित तान,
कुपित हर भ्रमर का गुंजन गान!
कुपित है हर मृदंग की थाप,
कुपित बैजू का स्वर आलाप!
कुपित है माँ का स्नेह दुलार,
कुपित और शुष्क मेघ-मल्हार!
कुपित सविता का स्वर्णिम ताप,
कुपित शिशु की कोमल पदचाप!
कुपित है सूर्य, कुपित है चंद्र,
कुपित हैं चौपाई और छंद!
कुपित कोकिल-पपीह के गीत,
कुपित मीरा के मन का मीत!
कुपित तरुओं का सहज विकास,
कुपित सरिता का चिर उल्लास!
कुपित है माताओं का मान,
कुपित हैं नववधू के अरमान!
कुपित है झांझर की झंकार,
कुपित ‘नूपुर’ की मधुर पुकार!
कुपित है प्रभु का सुमिरन गान,
कुपित हर चेहरे की ‘मुस्कान’!
कुपित है अंतस् का हर तार,
कुपित है तप्त रुधिर की धार!
कुपित सा निज स्वर है अनजान,
कुपित हैं मुझसे मेरे प्राण!!
अब और करूँ क्या व्यक्त, कुपित इस कलम-स्याह का कण-कण है,
मानव के मन में हर्ष नहीं, अब कुपित विचारों का रण है!
यह गरल-दृश्य, इस प्रलयकाल के, मानव-उर का दर्पण है,
यह भावनाओं का मर्दन है, महाकाल का ‘तांडव-नर्तन’ है!!
- रोहित श्रीवास्तव “अथर्व”
यह सम्वत् प्रलयंकारी है
7 years ago

हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका हार्दिक स्वागत है. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाऐं.
ReplyDeleteआपका स्वागत है ब्लॉग जगत में ,और आपके निरंतर लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं ........
ReplyDeleteभावनाओं की सुंदर प्रस्तुति. स्वागत.
ReplyDeleteहिन्दी ब्लाग परिवार मे आपका हार्दिक स्वागत एवम शुभकामनायें।
ReplyDeleteLekin hum harshit hain aapaki kavita padhakar.
ReplyDeleteshabdon ka badhiya istemaal kiya hai
charo or yahi hai, narayan narayan
ReplyDeleteब्लोगिंग जगत में स्वागत है
ReplyDeleteसुन्दर रचना के लिए शुभकामनाएं
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहिए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लिए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लिए देखें
www.chitrasansar.blogspot.com
बहुत सुन्दर रचना है।बधाई।
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